Bihar Politics: BJP के इस MLA ने पास की BPSC की परीक्षा, कहा- समाज सेवा करना है लक्ष्य.






बिहार के सीतामढ़ी जिले के बथनाहा विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी विधायक इंजीनियर अनिल राम ने बीपीएससी की परीक्षा में सफलता हासिल की है. बीजेपी विधायक इंजीनियर अनिल राम ने बीपीएससी के सहायक अभियंता का पद की मुख्य परीक्षा पास की है. परीक्षा पास करने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पैसा कमाना और धन अर्जित करना उनका लक्ष्य नहीं है. जनता की सेवा करना उनका लक्ष्य है.

अनिल राम नहीं करेंगे नौकरी : उन्होंने कहा कि बीजेपी ने काफी भरोसा कर मुझे टिकट दिया था. मुझे उस भरोसे को बरकरार रखना है. उन्होंने बताया कि समाजसेवा करना अब उनके जीवन का मुख्य लक्ष्य बन चुका है. उन्होंने बताया कि काफी दिनों पहले परीक्षा दी थी. तीन दिन पहले रिजल्ट आया है. लेकिन जब मैंने परीक्षा दी थी, तभी मुझे लग गया था कि मैं सफल हो जाऊंगा. विधायक बनने के बाद रिजल्ट आया यह और भी खुशी की बात है. लेकिन मैं नौकरी नहीं करूंगा. मैं बतौर विधायक देश की सेवा करूंगा.




जूनियर इंजीनियर के रूप में कर चुके हैं काम : बता दें कि विधायक बनने से पहले इंजीनियर अनिल राम ने झारखंड राज्य में निर्माण विभाग में जूनियर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में बीजेपी की से तरफ से टिकट मिलने से पहले वे निर्माण विभाग के कर्मचारी के तौर पर सीतामढ़ी, शिवहर और मधुबनी के बेनीपट्टी में काम करते थे. हालांकि, चुनाव में टिकट मिलने और जीतने के बाद वे इनदिनों क्षेत्र की जनता के सेवा में लगे हैं.


गौरतलब है कि अनिल राम ने बिरला इस्टिच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रांची से 2015 में सिविल इंजीनियरिंग से स्नातक की डिग्री ली है. बचपन से ही वे आरएसएस की नीतियों को फॉलो करते आ रहे हैं और पूर्व पीएम अटल बिहारी बाजपेयी और पीएम नरेंद्र मोदी को अपना आदर्श मानते हैं. अनिल राम के पिता जो रिटायर्ड हेड मास्टर हैं वो भी विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष रहे हैं.





मुख्‍यमंत्री नीतीश के अध्‍यक्ष पद छोड़ने के बाद अब JDU में बड़ी फेरबदल, एक साथ बदले गए 41 जिलाध्‍यक्ष.



बिहार के सत्‍ताधारी जनता दल यूनाइटेड में बड़ी फेरबदल की गई है। पार्टी के संगठन जिलों के 41 जिलाध्‍यक्ष एक झटके में बदल दिए गए हैं। हालांकि, इसकी उम्‍मीद पहले से ही लगाइ जा रही थी। इस फेरबदल को बीते विधानसभा चुनाव  में पार्टी को मिली हार से जोड़कर देखा जा रहा है। विदित हो कि जेडीयू ने विधानसभा चुनाव में कमजोर हुई स्थिति के कारणों पर मंथन के बाद जिम्मेदार अपने लोगों पर कार्रवाई की तैयारी कर ली थी।

विदित हो कि कुछ समय पहले मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष का पद छोड़ दिया था। इसके बाद प्रदेश अध्‍यक्ष भी बदले गए। अब एक साथ 41 जिलाध्‍यक्ष बदल दिए गए हैं।

जेडीयू के 41 जिलाध्यक्षों की सूची जारी : जेडीयू ने अपने 41 संगठन जिलों के नए अध्यक्ष की सूची जारी कर दी है। नए प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने जिलाध्यक्षों की जो सूची जारी की है, उसमें कई पूर्व मंत्रियों व विधायकों को स्थान मिला है। पूर्व विधायक अरुण मांझी को पटना जिला जेडीयू का अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं परशुराम पारस पटना के बाढ़ संगठन जिला के अध्यक्ष होंगे।

< div class="separator" style="clear: both; text-align: justify;">मुख्यालय प्रभारी अनिल कुमार ने बताया कि भीष्म सहनी को बगहा, शुत्रुघ्न कुशवाहा को पश्चिम चंंपारण, रतन सिंह पटेल को पूर्वी चंपारण, कमलेश पांडेय को शिवहर, सत्येंद्र कुशवाहा को सीतामढ़ी, अजय चौधरी को दरभंगा, राजेंद्र प्रसाद यादव को सुपौल, सत्येंद्र कामत को मधुबनी, आशीष कुमार पटेल को अररिया, नौशाद आलम को किशनगंज, श्रीप्रसाद महतो को पूर्णिया, शमीश इकबाल को कटिहार, मंजू कुमारी उर्फ गुड्डी देवी को मधेपुरा, चंद्रदेव मुखिया को सहरसा, मनोज कुमार को मुजफ्फरपुर, संजय चौहान को गोपालगंज, उमेश ठाकुर को सिवान, विशाल सिंह राठौर को सारण, सुभाषचंद्र सिंह को वैशाली, अश्वमेघ देवी को  समस्तीपुर, रुदल राय को बेगूसराय, बबलू मंडल को खगडिय़ा, वीरेंद्र सिंह कुशवाहा को नवगछिया, पंचम श्रीवास्तव को भागलपुर, अमरेंद्र कुमार सिंह को बांका, संंतोष सहनी को मुंगेर, रामानंद मंडल को लखीसराय, रणधीर कुमार उर्फ सोनी मुखिया को शेखपुरा, सलमान रागिब को नवादा, सियाशरण ठाकुर को नालंदा, संजय सिंह को भोजपुर, संतोष कुमार निराला को बक्सर, इसरार खां को कैमूर, नागेंद्र चंद्रवंशी को रोहतास, मंजू देवी को अरवल, राहुल शर्मा को जहानाबाद, विश्वनाथ सिंह को औरंगाबाद, द्वारिका प्रसाद को गया तथा शंभु शरण को जमुई का जिला जेडीयू का अध्यक्ष बनाया गया है।

शीर्ष नेतृत्‍व में पहले हो चुका बड़ा बदलाव : विदित हो कि विधानसभा चुनाव में कम सीटें मिलने के बाद जेडीयू नेतृत्व ने जो फीडबैक लिया, उसमें बड़े पैमाने पर जिलाध्यक्षों की भूमिका संदिग्‍ध नजर आई। इस बीच पार्टी में शीर्ष स्‍तर पर भी बड़ा बदलाव हुआ। मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने जेडीयू अध्‍यक्ष की कमान आरसीपी सिंह (RCP Singh) को सौंप दी तो बीमार चल रहे बशिष्‍ठ नारायण सिंह (Bashistha Narayan Singh) की जगह उमेश कुशवाहा (Umesh Kushwaha) को प्रदेश अध्‍यक्ष बना दिया गया। अब बड़े पैमाने पर जिलाध्‍यक्षों को बदल दिया गया है। सूत्रों के अनुसार पार्टी में और भी कई बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।





NoteBandi: क्या बंद हो जाएंगे 100 रुपये के पुराने नोट? जानिए क्या है RBI का जवाब.






RBI Latest News: आरबीआई (RBI) के Assistant General Manager बी महेश (B Mahesh) के एक बयान ने नोटबंदी (Demonetization) की याद दिला दी है. बी महेश ने कहा है कि रिजर्व बैंक (Reserve Bank) 5, 10 और 100 रुपये के पुराने नोट वापस लेने की योजना पर विचार कर रहा है. अगर सब कुछ ठीक रहा तो मार्च (March) और अप्रैल (April) में इसका ऐलान किया जा सकता है. 

100 रुपये का नोट होगा बंद : समय-समय पर नकली नोटों (Fake Note) के खतरे को टालने के लिए रिजर्व बैंक (Reserve Bank) पुरानी सीरीज के नोटों को बंद कर देता है. अधिकृत ऐलान के बाद बंद किए गए सभी पुराने नोटों (Old Note) को बैंक में जमा कराना होता है. जमा कराए गए कुल नोटों की कीमत बैंक खाते में जमा कर देती है या नया नोट दे देती है.




Wine Smuggling : बिहार में शराबबंदी पर एसपी का पत्र वायरल, उत्पाद इंस्पेक्टर से लेकर सिपाही तक शराब के धंधे में लिप्त हैं.






बिहार में शराबबंदी के बावजूद शराब का धंधा होने को लेकर एसपी मद्यनिषेध ने उत्पाद विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़ा किया है। एसपी द्वारा शराब के धंधे में उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर, दारोगा और सिपाही के संलिप्त होने का आरोप लगाते हुए इनके और रिश्तेदारों की संपत्ति की जांच करने को कहा गया है। इस बाबत उन्होंने सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को पत्र लिखा है। यह पत्र सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है। 

एसपी मद्यनिषेध द्वारा लिखे गए पत्र में कहा गया है कि बिहार के सभी थाना क्षेत्र में चोरी-छुपे उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर, दारोगा और सिपाही को चढ़ावा चढ़ाकर शराब की खरीद-बिक्री का धंधा किया जा रहा है। इससे शराबबंदी कानून का मजाक उड़ रहा है। 

मैं कई दिनों से अस्वस्थ हूं। 1 जनवरी से दफ्तर नहीं गया हूं। इस पत्र के बाबत मुझे कोई जानकारी नहीं है  - राकेश कुमार सिन्हा, एसपी मद्यनिषेध.

उन्होंने विगत वर्षो से उत्पाद विभाग में कार्यरत इंस्पेक्टर, दारोगा और सिपाहियों के साथ उनके रिश्तेदारों की चल-अचल संपत्ति की जांच करने के साथ ही इनके परिवार के सदस्यों के मोबाइल लोकेशन की जांच करने को कहा है। 

यह पत्र 6 जनवरी को लिखा गया है। उस वक्त एसपी मद्यनिषेध के पद पर राकेश कुमार सिन्हा पदस्थापित थे। मंगलवार को सात आईपीएस अफसरों का तबादला किया गया है, जिसमें उन्हें विशेष शाखा में एसपी बनाया गया है। 
 



बिहार में भी शुरू होंगी शराब की दुकानें?  लॉकडाउन के कारण बिहार की आर्थिक घाटा को कम करने के लिये कर रही हैं विचार.



भारत में आज लॉकडाउन 3.0 के पहले दिन शराब की दुकानें खुलीं तो देशभर में ख़रीददारों की लाइन लग गई। शराब की बिक्री तो शुरू कर दी गई है लेकिन बाक़ी कारोबार बंद हैं। ऐसे में सवाल उठा है कि शराब की बिक्री सरकारों के लिए इतनी ज़रूरी क्यों हैं। 


बेपटरी हुई भारत अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को शराब बेचने की छूट दे दी है, जिसके बाद सभी राज्य सरकार रणनीति के तहत शराब बेच रही है। इसी बीच छत्तीसगढ़ और पंजाब ने शराब की ऑनलाइन होम डिलीवरी शुरू की है। दोनों राज्यों के इस पहल के बाद माना जा रहा है कि अन्य राज्यों में भी ऑनलाइन होम डिलीवरी शुरू हो। 


लॉकडाउन से उत्पन्न आर्थिक तंगी से निपटने को कई राज्यों ने शराब की बिक्री का सहारा लिया है. तो क्या इस स्थिति में सीएम नीतीश कुमार को शराबबंदी हटाने या उसमें कुछ संशोधन के साथ लागू करने की पहल करनी चाहिए?

बिहार सरकार बिहार की आर्थिक घाटा को कम करने के लिये बिहार में शुरू हो सकती है फिर से शराब की बिक्री। मिली जानकारी के अनुसार कोरोना की वजह से हुए बिहार के वित्तीय घाटे को कम करने के लिए बिहार सरकार के सामने शराब की बिक्री दोबारा चालू करने का प्रस्ताव रखा गया है जिसपे सरकार विचार कर रही है। बिहार में 37 प्रतिसत राजस्व वसूली शराब से होती थी, ऐसे में सरकार पहले से घाटे में थी और अब कोरोना महामारी की वजह से बिहार की आर्थिक स्थिति और भी कमजोर होती जा रही है जिस वजह से सरकार के सामने यह प्रस्ताव आया है। हालाँकि सरकार की और से अभी तक इसपर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।




क्या कहते हैं विशेषज्ञ : इस सवाल का जवाब जब हमने आर्थिक-सामाजिक मामलों के विशेषज्ञ प्रो. नवल किशोर चौधरी से पूछा तो उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अनप्रेडिक्टेबल व्यक्ति हैं. उन्हें समझना एक तरह से नामुमकिन है. वे कब क्या फैैसला ले लेंगे इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है.'



बकौल नवल किशोर चौधरी, 'ये इस बात से प्रमाणित होता है कि जब 2005 में नीतीश सत्ता में लौटे थे, तो उसके बाद उन्होंने गांव-गांव, गली-गली, शराब की दुकानें खुलवा दी थीं. ये फैसला भी बड़ा ही बेतुका था. पर तब उन्होंने राजस्व वृद्धि की दलील दी थी. तब वे भी सिर्फ पैसा-पैसा ही कर रहे थे और इसे बड़े पैमाने पर एक अभियान के तहत लागू किया गया था.'


प्रो. चौधरी कहते हैं कि वर्ष 2016 में जब प्रदेश में शराबबंदी कानून लाया गया तो उस समय नीतीश कुमार की सहयोगी रही आरजेडी के भीतरी विरोध के बावजूद उन्होंने इसे लागू कर दिया. हालांकि तब सामने से आकर आरजेडी ने भी सीएम नीतीश के फैसले का समर्थन किया था. शायद वे सामाजिक सरोकार से पीछे नहीं हटना चाहते थे.


सरकार के मंत्री की राय : शराबबंदी वापस लेने के बारे में जब हमने बिहार सरकार के एक मंत्री से पूछा कि जब अन्य राज्य सरकारें इसे लागू कर रही हैं और अच्छा-खासा राजस्व इकट्ठा कर रही हैं. क्या बिहार सरकार भी ऐसा सोच रही है कि शराबबंदी कानून में कुछ संशोधन किया जाए? मंत्री ने तो पहले कहा कि इस पर वे कुछ नहीं कह सकते हैं. बाद में उन्होंने साफ कह दिया कि इस पर अगर कोई बोलेंगे तो सिर्फ सीएम नीतीश ही बोलेंगे.


हालांकि प्रो. नवल किशोर चौधरी कहते हैं कि शराबबंदी का कानून को सिर्फ इकोनॉमी के नजरिये से देखना उचित नहीं है. इसका सोशल आस्पेक्ट भी है. प्रो. चौधरी ने कहा कि इसे इस संदर्भ में भी देखने की जरूरत है कि आज कोरोना लॉकडाउन में सारी फैक्ट्रियां बंद हो गईं तो प्रदूषण स्तर में बड़ी कमी आई.


यहां तक कि जालंधर से धौलागिरी की पहाड़ियां दिखने लगी हैं. यही बात बिहार में शराबबंदी कानून से जुड़ती है. बिहार में इस कारण क्राइम रेट कम हो गए. युवकों की आदतों में परिवर्तन आया और गरीब तबके की महिलाओं पर अत्याचार में कमी आई है. इसे सिर्फ रेवेन्यू गेन या रेवेन्यू लॉस से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.


कानून को लचीला बनाया जा सकता है : वहीं, वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय इस बारे में कहते हैं कि यह सही है कि शराबबंदी कानून के लागू होने से कोषागार पर बोझ बढ़ा है. लेकिन यह एक अच्छी पहल बिहार सरकार ने की थी. हालांकि कई संदर्भों में सोचा जाए तो इस कानून में थोड़ा संशोधन कर इसे लचीला बनाया जा सकता है. लेकिन यह सरकार को सोचना होगा कि इसके दूरगामी क्या परिणाम हो सकते हैं.


रवि उपाध्याय कहते हैं कि अगर कानून थोड़ा लचीला होगा तो यह एक अच्छी पहल हो सकती है, इसमें कहीं कोई दो मत नहीं है. पर यह सरकार अपनी ओर से तय करेगी. जिस तरह से बिहार में संसाधन का अभाव है और अब बड़ा आर्थिक संकट आने वाला है, ऐसे में केंद्र सरकार के भरोसे ही बैठना कहां तक उचित रहेगा.


बकौल रवि उपाध्याय सरकार को अपना रेवेन्यू जेनरेट करना ही पड़ेगा. अगर इस कानून को लचीला बनाती है तो आर्थिक बोझ कुछ हद तक कम हो सकता है. यह रकम बिहार की जनता की बेहतरी के लिए खर्च कर सकती है. हालांकि सिर्फ यही विकल्प नहीं है. साथ ही अन्य सेक्टर जो हैं, उस पर भी गंभीरता से सोचना पड़ेगा.


समाजशास्त्री अजय कुमार झा कहते हैं कि शराबबंदी का समाजिक संदर्भ में बेहतरीन इम्पैक्ट है. लंबे समय से ये झूठ फैलाया जाता है कि कि इससे इकोनॉमी को फायदा होता है . जो समाज के हित में नहीं है वैसी इकोनॉमी का क्या करना.


बकौल अजय कुमार झा अगर ऐसा ही है तो वेश्यावृत्ति और अन्य बुराइयों को भी लागू किया जाना चाहिए क्या? अफीम और ड्रग्स को भी लीगेलाइज कर देना चाहिए क्या? ये भी तो रेवेन्यू जेनरेट करते हैं, लेकिन इसका सोशल कॉस्ट कितना पे करते हैं.


अजय झा कहते हैं कि जब भी सरकार के पास पैसा आता है वह जनता से ही आता है, इसमें कोई नई बात नहीं है. शराब का जो एक्सपेंडीचर है, वह भी तो काफी बड़ा है. इससे बीमारियां होती हैं, अपराध होते हैं, इसके भी तो कॉस्ट होते हैं.


झा कहते हैं कि जब शराबबंदी लागू की गई थी तब इसका लॉस 3000 करोड़ से 4000 करोड़ रुपए कहा गया था. अब यह बढ़कर 8000 करोड़ हुआ होगा. लेकिन इसकी भरपाई हमें दूसरे विकल्पों के जरिये करनी चाहिए, न कि शराबबंदी कानून खत्म करके. मेरा तो मानना है कि इसे और भी सख्त किया जाना चाहिए और अभी जो चोरी छिपे शराब मिल जाती है, वह भी बैन हो. INPUT-NEWS18




बिहार से जुडी ताज़ा ख़बरों की जानकारी के लिए हमारे व्हाट्सप्प ग्रुप से जुड़े साथ ही हमें फेसबुक पर ज्वाइन करें और  पर फॉलो करें!




पुराने पोस्ट
नई पोस्ट

टिप्पणी पोस्ट करें