Bihar Crime : बिहार में अपराध नियंत्रण का दावा करने वाले नितीश सरकार का सच, देखिए क्या कहते हैं आंकड़े.

बिहार में इन दिनों अपराध काबू से बाहर है। आए दिन एक के बाद एक अपराध के मामले सामने आते जा रहे हैं। अपराधी सरेआम, सरेराह, दिनदहाड़े, भरी दुपहरी, शाम, सुबह, रात यानी जहां चाहें वहां मर्डर करते हैं, लूटपाट करते हैं। डिप्टी सीएम से लेकर सांसद और विधायक तक पुलिस और सरकार से गुहार लगाते हैं। सिर्फ गुहार लगा पाते हैं। पुलिस को चेतावनी देते हैं। नीतीश कुमार मीटिंग पर मीटिंग करते हैं। क्राइम कंट्रोल करने की हिदायत देते हैं। मगर ग्राउंड पर इसका कोई असर नहीं दिखता। अपराधी अपने मूड और मिजाज के हिसाब से अपना 'काम' करते जा रहे हैं।



बिहार बढ़ते अपराध पर मुख्यमंत्री नितीश कुमार से जा भी सवाल पुछा जाता है तो,  वे लालू - राबड़ी राज की दुहाई देने लगते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है की तब और अब के बिहार में क्या अंतर आया है। NCRB के आंकड़ों के मुताबिक, 2005 में बिहार में 1.07 लाख क्रिमिनल केस दर्ज किए गए थे, यानी रोजाना 293 मामले। लेकिन, 2019 में बिहार में 2.69 लाख मामले सामने आए हैं यानी, रोज 737 केस। ये आंकड़े ये भी बताते हैं कि 15 सालों में देश में क्राइम बढ़ा तो था, लेकिन बाद में कम भी होने लगा, लेकिन बिहार और झारखंड में लगातार केस बढ़ रहे हैं।



बिहार में अपराध 2005 - 2019 : लालू प्रसाद यादव ने अपनी पत्नी राबड़ी देवी के माध्यम से 1990 से 2005 तक बिहार पर शासन किया। नीतीश कुमार 2005 से मुख्यमंत्री रहे हैं, 2014 में कुछ महीनों को छोड़कर जब उन्होंने लोकसभा चुनावों के बाद पद छोड़ दिया। एनडीए का दावा है कि कुमार के सत्ता में आने के बाद से कानून व्यवस्था की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है। एक तथ्य इन दावों की जाँच करता है और आंकड़ों को पढ़ने से साबित होता है कि तस्वीर उतनी काली और सफेद नहीं है। 


NCRB के अनुसार, 90 के दशक के दौरान हत्याओं की निरपेक्ष संख्या में लगातार वृद्धि हुई और 2000 में 5,356 के सभी समय के उच्च स्तर से 2019 में 3,138 तक गिरना शुरू हो गया - एक गिरावट जो राजद के कार्यकाल के दौरान शुरू हुई और नीतीश-युग में जारी रही। एनसीआरबी के अनुसार, शुद्ध रूप से नीतीश कुमार के शासन को देखते हुए, 2005 से 2019 के बीच हत्याओं में 9.5 प्रतिशत की गिरावट आई थी।


एनसीआरबी के अनुसार, 2005 और 2019 के बीच हत्या के मामलों में 125 प्रतिशत की वृद्धि हुई और अपहरण और अपहरण में लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अपहरण के मामलों के बारे में, हालांकि, अधिकांश मामले महिलाओं और लड़कियों से संबंधित होते हैं यानी परिवार के खिलाफ मामला दर्ज करना। यहां, बिहार पुलिस का टूटना जिसमें फिरौती के लिए अपहरण दिखाया गया है, अपराध की घटनाओं के लिए एक बेहतर मार्कर है। इसके अनुसार, 2019 में धन के लिए केवल 43 अपहरण हुए, 2005 से 82.8 प्रतिशत की गिरावट आई। बलात्कारों में लगातार कमी आई जिसमें 36 प्रतिशत की गिरावट आई। डकैत 67 फीसदी तक गिर गए जबकि दंगे और डकैती में उतार-चढ़ाव रहा है। 




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